“मध्य प्रदेश सरकार ने डिजिटल MP मिशन के तहत 2025 में हर गांव तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। भारत नेट और PM-WANI जैसी योजनाओं के साथ, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी, ई-गवर्नेंस, और ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल ग्रामीण भारत को डिजिटल युग से जोड़ेगी, जिससे आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को बल मिलेगा।”
मध्य प्रदेश में डिजिटल क्रांति: हर गांव अब हाई-स्पीड इंटरनेट से जुड़ेगा
मध्य प्रदेश सरकार ने 2025 में डिजिटल MP मिशन के तहत एक ऐतिहासिक कदम उठाया है, जिसका लक्ष्य राज्य के हर गांव को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ना है। यह पहल डिजिटल इंडिया प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसके तहत भारत नेट और PM-WANI (प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस) जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस मिशन का उद्देश्य ग्रामीण भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना, ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देना, और शिक्षा, स्वास्थ्य, और व्यापार जैसे क्षेत्रों में तकनीकी पहुंच सुनिश्चित करना है।
भारत नेट: ग्रामीण कनेक्टिविटी की रीढ़
भारत नेट प्रोजेक्ट, जो विश्व का सबसे बड़ा ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी कार्यक्रम है, इस मिशन का आधार है। मध्य प्रदेश में, इस योजना के तहत हजारों ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर केबल के जरिए जोड़ा जा चुका है। 2025 तक, राज्य की सभी 23,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध होगी। यह न केवल इंटरनेट सर्फिंग को आसान बनाएगा, बल्कि ग्रामीणों को ऑनलाइन सरकारी सेवाओं, जैसे राशन कार्ड, पेंशन योजनाओं, और ई-कॉमर्स तक पहुंच प्रदान करेगा।
PM-WANI: सस्ता और सुलभ वाई-फाई
PM-WANI योजना के तहत, मध्य प्रदेश में 5 करोड़ पब8925a64a-6e73-4c3b-9c7f-2b2c0b7a7b7blic वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित करने का लक्ष्य है। इस योजना के तहत, कोई भी व्यक्ति अपने क्षेत्र में वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित कर सकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ता और तेज़ इंटरनेट उपलब्ध होगा। दूरसंचार विभाग (DoT) ने हाल ही में PM-WANI के दिशानिर्देशों में संशोधन किया है, जिससे टेलीकॉम कंपनियों और पब्लिक डेटा ऑफिस (PDO) के बीच रोमिंग की सुविधा आसान हो गई है। इससे मोबाइल नेटवर्क पर भीड़ कम होगी और इंटरनेट की गति बढ़ेगी।
ग्रामीण सशक्तिकरण के लिए डिजिटल अवसर
यह मिशन केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं। कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSC) के माध्यम से, ग्रामीणों को ऑनलाइन बैंकिंग, ई-शिक्षा, और टेलीमेडिसिन जैसी सेवाओं का लाभ मिलेगा। उदाहरण के लिए, मधेपुरा जैसे जिलों में पहले चरण में पंचायतों में वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित किए गए हैं, जिससे स्थानीय लोग ऑनलाइन टिकट बुकिंग, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, और मनोरंजन के लिए इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं।
शुगर बॉक्स: बिना इंटरनेट के ऑनलाइन अनुभव
मध्य प्रदेश में शुगर बॉक्स जैसी नवीन तकनीकों का उपयोग भी शुरू हुआ है। यह हाइपरलोकल एज क्लाउड टेक्नोलॉजी ग्रामीणों को बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी के भी ऑनलाइन मूवी, टीवी शो, और न्यूज़ तक पहुंच प्रदान करती है। यह सेवा उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पहले से सफल है और अब मध्य प्रदेश के 100 से अधिक गांवों में लागू की जा रही है। यह ग्रामीण भारत में डिजिटल डिवाइड को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
5G और भविष्य की योजनाएं
मध्य प्रदेश में 5G रोलआउट भी तेजी से हो रहा है, जो भारत के सबसे तेज़ 5G नेटवर्क विस्तार का हिस्सा है। 2025 तक, राज्य के कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 5G कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी, जिससे डिजिटल सेवाओं की गति और गुणवत्ता में सुधार होगा। इसके अलावा, इंडिया AI मिशन के तहत, मध्य प्रदेश में AI सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा रहे हैं, जो स्थानीय स्टार्टअप्स और युवाओं को तकनीकी नवाचार के अवसर प्रदान करेंगे।
चुनौतियां और समाधान
हालांकि यह मिशन महत्वाकांक्षी है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में ऑप्टिकल फाइबर केबल की दूरी 500 मीटर से अधिक होने के कारण कनेक्टिविटी में रुकावटें आ रही हैं। इसके समाधान के लिए, सरकार सैटेलाइट आधारित इंटरनेट और रेलटेल के ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का उपयोग कर रही है। मध्य प्रदेश में रेलटेल ने रेलवे स्टेशनों के पास 58,742 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच आसान होगी।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
डिजिटल MP मिशन का प्रभाव केवल तकनीकी तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा, क्योंकि छोटे उद्यमी और MSMEs अब ऑनलाइन मार्केटप्लेस जैसे ONDC (Open Network for Digital Commerce) के माध्यम से अपने उत्पाद बेच सकेंगे। इसके अलावा, स्वामित्व योजना के तहत 2.4 करोड़ से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड्स और 6.47 लाख गांवों का मैपिंग पूरा हो चुका है, जिससे ग्रामीणों को जमीन संबंधी स्पष्टता मिलेगी। यह डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रामीण भारत को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ेगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख विभिन्न समाचार स्रोतों, सरकारी घोषणाओं, और डिजिटल इंडिया पहल से संबंधित जानकारी पर आधारित है। डेटा और तथ्य जुलाई 2025 तक की नवीनतम उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे नवीनतम अपडेट के लिए आधिकारिक सरकारी वेबसाइट्स और समाचार पोर्टल्स की जांच करें।