“उत्तर प्रदेश सरकार 2025 में युवाओं को डिजिटल युग के लिए तैयार करने के लिए IT ट्रेनिंग प्रोग्राम्स को बढ़ावा दे रही है। इन प्रोग्राम्स से लाखों युवा AI, साइबर सिक्योरिटी, और कोडिंग जैसे कौशल सीख रहे हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर खुल रहे हैं। यूपी के ये प्रयास डिजिटल इंडिया को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।”
उत्तर प्रदेश में युवाओं को डिजिटल भविष्य के लिए तैयार करने की पहल
उत्तर प्रदेश सरकार ने डिजिटल इंडिया मिशन के तहत युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए कई IT ट्रेनिंग प्रोग्राम्स शुरू किए हैं। 2025 में ये प्रोग्राम्स तेजी से विस्तार कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य है युवाओं को आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में कुशल बनाना।
मुख्य IT ट्रेनिंग पहलें
यूपी सरकार ने Digital Skills for Youth और Skill India जैसे प्रोग्राम्स के तहत कई स्कीम्स लागू की हैं। इनमें से प्रमुख हैं:
UP Digital Literacy Mission: यह प्रोग्राम ग्रामीण और शहरी युवाओं को बेसिक डिजिटल स्किल्स जैसे कंप्यूटर ऑपरेशन, इंटरनेट यूज, और डिजिटल पेमेंट सिस्टम्स (जैसे UPI) सिखाता है। 2024 तक, इस प्रोग्राम ने 10 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया है।
AI और साइबर सिक्योरिटी कोर्स: लखनऊ और नोएडा जैसे शहरों में AI और साइबर सिक्योरिटी पर केंद्रित कोर्स शुरू किए गए हैं। इन कोर्सेस में युवाओं को डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, और एथिकल हैकिंग जैसे कौशल सिखाए जा रहे हैं।
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP): सरकार ने Infosys, TCS, और Microsoft जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी की है ताकि युवाओं को इंडस्ट्री-रिलेटेड ट्रेनिंग दी जा सके। इन कंपनियों के विशेषज्ञ ट्रेनर के रूप में काम करते हैं और प्रैक्टिकल नॉलेज प्रदान करते हैं।
महिलाओं के लिए विशेष प्रोग्राम्स: यूपी सरकार ने महिलाओं को डिजिटल क्षेत्र में सशक्त बनाने के लिए विशेष कोर्स शुरू किए हैं, जैसे वेब डेवलपमेंट और डिजिटल मार्केटिंग। इन कोर्सेस में मुफ्त ट्रेनिंग और प्लेसमेंट सपोर्ट भी शामिल है।
रोजगार के अवसर और प्रभाव
इन प्रोग्राम्स का प्रभाव यूपी के युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोल रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में यूपी में IT सेक्टर में 5 लाख से अधिक नौकरियां सृजित होने की उम्मीद है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे शहर IT हब के रूप में उभर रहे हैं, जहां प्रशिक्षित युवा डेवलपर, डेटा साइंटिस्ट, और साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ के रूप में काम कर रहे हैं।
चुनौतियां और समाधान
हालांकि ये प्रोग्राम्स प्रभावी हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली की कमी एक बड़ी बाधा है। इसके अलावा, कई युवाओं को अंग्रेजी भाषा की कमी के कारण डिजिटल कंटेंट समझने में दिक्कत होती है। सरकार ने इन समस्याओं के समाधान के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट उपलब्ध कराने और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की योजना बनाई है।
युवाओं की कहानियां
लखनऊ की 22 वर्षीय प्रिया सिंह ने UP Digital Literacy Mission के तहत वेब डेवलपमेंट का कोर्स पूरा किया और अब एक स्टार्टअप में फ्रंट-एंड डेवलपर के रूप में काम कर रही हैं। प्रिया कहती हैं, “यह कोर्स मेरे लिए गेम-चेंजर रहा। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इतने कम समय में इतना कुछ सीख सकती हूं।”
इसी तरह, कानपुर के मोहित यादव ने साइबर सिक्योरिटी कोर्स के बाद एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब हासिल की। उनकी कहानी उन लाखों युवाओं की प्रेरणा है जो डिजिटल स्किल्स के जरिए अपने भविष्य को संवारना चाहते हैं।
भविष्य की योजनाएं
2026 तक, यूपी सरकार का लक्ष्य है कि 50 लाख युवाओं को डिजिटल स्किल्स में प्रशिक्षित किया जाए। इसके लिए सरकार डिजिटल लर्निंग सेंटर्स की संख्या बढ़ाने और ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म्स जैसे SWAYAM और DIKSHA को और सुलभ बनाने पर काम कर रही है।
Disclaimer: यह लेख उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट्स, डिजिटल इंडिया रिपोर्ट्स, और अन्य विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। यह केवल सूचना के उद्देश्य से है और इसमें दिए गए आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं।